शुक्रवार, 15 अगस्त 2008

स्वतंत्रता-दिवस समारोह

ख़ाके वतन को ओढ़ के सोईं जवानियाँ,
अपने
लहू से लिख कर ज़मी पर कहानियाँ ;

होगा
वतन आजाद लहू रंग लाएगा
,
तारीख़
में मिलेंगी हमारी कहानियाँ.

स्वतंत्रता दिवस की उजियारी भोर के साथ प्रकृति वर्षा की रिमझिम फुहारें लिए लखनऊ शहर को अपने आशीष से शिक्त कर रही थी. स्वतंत्रता के अमर बलिदानियों की कहानियों को दुहराने और उन्हें नमन करने का आख़िर दिन भी तो विशेष था.

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित एतिहासिक विधान-सभा परिसर को दुल्हन की तरह सजाया गया था. पुष्प गुच्छ से अलंकृत प्रांगण मनमोहक वातावरण उपस्थित कर रहे थे. तिरंगे सदृश्य वसन की लम्बी चादरों से विधान-भवन की गुम्बदें शोभएमान हो रहें थीं. मौसम की भविष्यवाणियों को ध्यान में रखते हुए 'वाटर-प्रूफ़' पंडाल की व्यवस्था की गए थी. बढ़ती आतंकवादी घटनाओं की वजह से सुरक्षा के चाक-चौबंद इन्तज़ाम थे. वर्षा तथा अत्यधिक कड़ी सुरक्षा-व्यवस्था के कारण यहाँ, पिछले वर्षों की तुलना में उपस्थिति कम थी. अधिकारियों, आमंत्रित अतिथियों, गण्यमान जनों तथा मीडिया सहकर्मियों के बीच प्रात: ठीक ९ बजे उत्तर-प्रदेश की मुख्यमंत्री सुश्री मायावती ने जैसे हीं तिरंगा फ़हराया, पूरा प्रांगण राष्ट्रगान की स्वर-लहरियों से गूँज उठा.

पर ये क्या ध्वजारोहण के के समाया ये फुहारें भी थम सी गईं, मानो वो भी सावधान की मुद्रा में आ गई हो. ध्वजारोहण के तुरत बाद अपने उदबोधन में सुश्री मायावती ने शहीदों को याद करते हुए दलित नेताओं की प्रशंसा की और अपने भाषण को बड़ी चतुराई से अपने सरकार की उपलब्धियों की तरफ़ मोड़ दिया.

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने ४ पुलिस अधिकारियों को उनके विशिष्ट वीरता कार्यों के लिए पुलिस सेवा पदक प्रदान किया.

आज पूरे दिन शहर भर में उत्सव का सा माहौल छाया रहा. हर ओर से देश-भक्ति गीतों की स्वरलहरियाँ गूंजती रहीं. चौक-चौराहे, नुक्कड़-गलियों में जहाँ स्थानीय लोगों, दुकानदारों ने भी बड़े उत्साह से तिरंगा फ़हराया; मिठाईयां बाँटी. सरकारी भवनों के अलावा निजी संस्थानों तथा घरों पर भी तिरंगे के पताके तथा रंग-बिरंगे बल्बों से प्रकाशित किया गया. इस बार का स्वतंत्रता-दिवस पर्व शान्ति तथा उल्लास के साथ बीता समारोह

मेरी तरफ़ से आपको स्वतंत्रता-दिवस की ढेरों बधाईयाँ !

1 टिप्पणी:

Meenu khare ने कहा…

फोटो कहाँ है ? शीर्षकहीन?